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नीलम शर्मा

कविता नीलम शर्मा 'अंशु' 1) खुद को कभी अकेला मत समझो अब तुम अकेले नहीं हो पुष्य, भानु, रुद्र और हम हैं न। जब भी लगें अंधियारे बादल घिरते से प्रकाशमय हो उठेगा सारा आलम। कैसे कोई खुद को अकेला न माने जब इस धरती पर क़दम रखता है और कूच करता है तब भी अकेली नन्हीं सी जान होता है आदमी। दुनिया के इस मज़मे में सबके होते हुए भी तन्हा, अकेला सा ही होता है आदमी। प्यारा सा बचपन जब जाता है छूट पीछे मंज़िल की तलाश में बढ़ते हुए पाता है खुद को अकेला ही आदमी। सैंकड़ों की भीड़ में हर पल चेहरे पर मुस्कान लपेटे सबकी नज़रों को झुठलाते भीतर ही भीतर कितना तन्हा, अकेला कैसे कर सकता है इन्कार भला इस बात से आदमी। उंगली पकड़ ... More
Published On : 25-02-2022 | article Type : Article | Views : 1 times | Rating :
কবিতার কোন দিন নেই প্রসেনজিৎ দাশগুপ্ত তুমি যে বলছো আজকে দিনটা কবিতার তবে কেন আমি প্রত্যহ দেখি ছবি তার? ... More
Published On : 25-02-2022 | article Type : Article | Views : 139 times | Rating :

बुझानी है आग सुभाष नीरव प्रेम के पंछी खतरे में हैं जंगल में नफरतों की आग सुलगी है हमें अपनी आँख के आँसुओं ... More
Published On : 25-02-2022 | article Type : Article | Views : 126 times | Rating :

গোরক্ষপুর এক্সপ্রেস ঝুমা চট্টোপাধ্যায় কিছুদিন হল আমার বাবা নাকে ঠিকমত নিঃশ্বাস পাচ্ছেন না । নিঃশ্বাসগুলি ... More
Published On : 25-02-2022 | article Type : Article | Views : 139 times | Rating :

দিল্লিলিখন পীযূষকান্তি বিশ্বাস আমাকে লিখতে হবে আর এক পৃথিবী বীজ থেকে শুরু করে তরুরাজির পর্ণমোচী হওয়া ... More